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ईरान से जंग के बीच अमेरिकी सेना को मिला प्लास्टिक से बना घातक हैंड ग्रेनेड, छर्रों के बजाय शॉकवेव से दुश्मनों को करता है ढेर

 Published : Apr 02, 2026 09:44 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 09:44 pm IST

अमेरिका सेना ने एक घातक हथियार पेश किया है। यह हथियार प्लास्टिक से बना है। यह एक हैंड ग्रेनेड है जिसे M111 नाम दिया गया है। चलिए इस हथियार के बारे में जानते हैं।

US Army - India TV Hindi
US Army Image Source : AP

US Army Plastic Hand Grenade: एक तरफ जहां ईरान से जंग जारी है तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने अपना नया जानलेवा हैंड ग्रेनेड पेश किया है। इस हैंड ग्रेनेड को M111 नाम दिया गया है और खास बात ये है कि यह प्लास्टिक से बना है। नया हथियार पारंपरिक ग्रेनेड से पूरी तरह अलग है। यह तरह धातु के टुकड़े फैलाने के बजाय, दुश्मनों को मारने के लिए शक्तिशाली शॉक वेव्स का इस्तेमाल करता है। जब यह वेव किसी व्यक्ति से टकराती है तो यह शरीर के टिशूज को बहुत तेजी से सिकोड़ती और फैलाती है, जिससे कान, फेफड़े, आंखें और पेट जैसे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

क्या हैं ग्रेनेड की खासियतें?

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया यह ग्रेनेड, पुराने ग्रेनेड के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और आमने-सामने की लड़ाई के लिए बेहतर है। पुराने ग्रेनेड इस्तेमाल करने वालों के लिए भी नुकसानदायक हो सकते थे। न्यू जर्सी के पिकाटिनी आर्सेनल में इस प्रोग्राम के प्रोजेक्ट मैनेजर, कर्नल विंस मॉरिस ने कहा, "BOP का इस्तेमाल करने वाला यह ग्रेनेड, किसी कमरे को दुश्मन लड़ाकों से तेजी से खाली कर सकता है। इससे दुश्मनों के पास छिपने की कोई जगह नहीं बचती, जबकि हमारी सेना सुरक्षित रहती है।"

कैसे काम करता है ग्रेनेड?

जब यह ग्रेनेड फटता है, तो इसका प्लास्टिक का खोल भाप बनकर उड़ जाता है, इसलिए आसपास कोई धातु के टुकड़े नहीं उड़ते। सैनिक M111 को किसी कमरे में फेंक सकते हैं। यह दीवारों, फर्नीचर या उपकरणों के पीछे छिपे दुश्मनों तक आसानी से पहुंच सकता है।

1968 के बाद यह आर्मी के लिए पहला नया ग्रेनेड है। 1968 में वियतनाम युद्ध के दौरान आर्मी ने MK3A2 ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था। उस पुराने ग्रेनेड को 1970 के दशक में इस्तेमाल से हटा दिया गया था, क्योंकि उसमें एस्बेस्टस होता था। इसके छोटे-छोटे रेशे फेफड़ों में जाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते थे।

बहदते रहे सेना के ग्रेनेड

पुराने MK3A2 ग्रेनेड को हटाने के बाद, सैनिकों ने मुख्य रूप से M67 ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। M67 ग्रेनेड चारों दिशाओं में धातु के टुकड़े फेंककर काम करता है, जिससे यह खतरनाक बन जाता है। ये टुकड़े आसपास खड़े लोगों, अपनी ही सेना के सैनिकों या दीवारों से टकराकर वापस आ सकते थे। RDX से चलने वाले इस ग्रेनेड के बड़े धमाके दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं या शरीर के अंगों को काटने की नौबत ला सकते हैं। लेकिन, अब अमेरिकी सेना के पास नय नया ग्रेनेट है तो बेहद घातक है।

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